बुधवार 11 मार्च 2026 - 08:26
अरब जगत के लिए एक एतिहासिक अवसर

आज मध्य एशिया मे परिवर्तित होते हालात यही बता रहे है कि अमेरिका के कई फ़ौजी अड्डे खाली हो चुके है और बाकी स्थानो से भी उसका निकलना कठिन नही रहा है। अगर अरब जगत इस वास्तविकता को समझ ले और अपने भविष्य के संबंध मे स्पष्ट कार्रवाई करे तो वह दिन दूर नही जब इस क्षेत्र मे विदेशी सैन्य शक्ति का द्वारा बंद हो जाएगा और अरब की धरती अपने असल खुदमुख्तार हैसीयत के साथ दुनिया के सामने खड़ी होगी।

लेखकः मौलाना सय्यद करामत हुसैन शऊर जाफ़री

हौज़ा न्यूज एजेंसी ! मध्य एशिया एक बार फिर एतिहासिक दौराहे पर खड़ा है। वर्षो तक इस क्षेत्र मे अमेरिकी सैन्य अड्डो को ऐसी हक़ीक़त बनाकर प्रस्तुत किया गया जैसे वह हमेशा के लिए यहा स्थापित रहेंगे। अरब जगत के बहुत से देशो मे अमेरिकी सैन्य बेस शक्ति, दबाव और राजनीतिक प्रभाव की निशानी समजे जाते थे। ऐसे महसूस होता था कि इस क्षेत्र के फ़ैसले यहा कि धरती पर नही बल्कि उनके अड्डो के छत्रछाया मे निर्धारित होते है। लेकिन इतिहास का दस्तूर है कि हालात हमेशा एकजैसे नही रहते, और कभी कभी एक घटना पूरे दृश्य को बदल देती है।

जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान को निशाना बनाने का प्रयास किया तो उन्हे गुमान था कि ईरान दबाव मे आ जाएगा और चुप्पी साध लेगा। मगर ईरन ने इस हमले को एक चैलेंज के रूप मे लिया और ऐसा जवाब दिया जिसने पूरे क्षेत्र मे हालात बदल दिए। ईरान के मिसाइलो हमलो ने अरब देशो मे स्थापित अमेरीक फौजी अड्डो को निशाना बनाया। वो अड्डे जिन्हे अमेरिका अपनी शक्ति की निशानी समझता था, देखते ही देखते तबाही का दृश्य प्रस्तुत करने लगे। इन हमलो ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब इस क्षेत्र मे एक तरफा शक्ति का समय गुज़र चुका है।

इन घटनाओ के पश्चात एक नई हक़ीक़त सामने आई। कई स्थानो पर अमेरिका को अपने फ़ौजी अड्डे खाली करने पड़े, कही उसकी फौज़ी उपस्थिति कम हो गई और कही उसे अपना सामान और फ़ौज वापस बुलाना पड़ा। जो सेना कल तक यहा अस्थाई रुप से अपना डेरा डाली बैठी थी, वह अब चुप्पी के साथ पैर समेटते दिखाई दे रही है। अमेरिका के लिए यह संदेश साफ है कि इस क्षेत्र मे अब पुराना अंदाज़ अधिक देर तक नही चल सकता।

यह दृश्य वास्तव मे इस वास्तविकता की याद दिलाता है कि शक्ति हमेशा हथियारो और अड्डो से स्थापित नही रहती। जब किसी राष्ट्र के सामने प्रतिरोध और इरादा खड़ा हो जाए तो बड़ी से बड़ी फ़ौजी ताकत भी कमज़ोर पड़ने लगती है। ईरान के जवाबी हमलो ने केवल कुछ अड्डो को निशाना नही बनाया बल्कि इस अवधारणा को भी चैलेंज किया कि मध्य पश्चिम हमेशा विदेशी ताकतो की छत्रछाया मे रहेगा।

इस स्थिति ने अरब दुनिया के सामने एक खुला सवाल रख दिया है। यह वही अरब धरती है जिस ने इतिहास मे बड़े बड़े विजयता, नेता और विचारक पैदा किए है। यही वह क्षेत्र है जहा से इल्म, संस्कृति और वीरता का प्रकाश दुनिया मे फैला। ऐसे राष्टृ अगर चाहे तो अपनी धरती के बारे मे फ़ैसले खुद कर सकते है। विदेशी फौजी अड्डे कभी भी किसी राष्ट्र के खुद मुखतारी की निशानी नही होते।

ईरान ने अपने व्यवहार, साहस और हिम्मत से एक बात स्पष्ट कर दी कि अगर कोई दबाव के सामने झुकने के बजाए डट कर खड़ा हो जाए तो बड़ी से बड़ी शक्ति को भी अपने पैर पीछे हटाने पड़ते है। आज क्षेत्र के कई अमेरिकी फ़ौजी अड्डे समाप्त हो चुके है और बाकी स्थानो से भी अमेरिका के निष्कासन की बाते हो रही है। जो ताकत कल तक यहा अपने वुजूद को ना क़ाबिल चैलेंज समझती था, आज उसे अपना बोरिया बिस्तर समेटने पड़ रहे है।

यह स्थिति अरब जगत के लिए केवल एक खबर नही बल्कि एक स्पष्ट संदेश है। अगर अरब देश अपनी ताकत, अपने साधन और अपनी धरती की क़द्र को पहचान लें, एकता के साथ खड़े हो और अमेरिकी फ़ौज को दुबारा अपने देशो मे कदम जमाने न दें, तो वह अपने क्षेत्र को विदेशी फ़ौजी उपस्थिति से हमेशा के लिए आज़ाद कर सकते है। इतिहास साक्षी है कि राष्ट्रो का सम्मान उसी समय सुरक्षित रहता है जब वह अपने निर्णय स्वम करते है और अपनी धरती की सुरक्षा दूसरो के सहारे नही बल्कि अपने इरादे और शक्ति से करते है।

यह भी वास्तविकता है कि विदेशी शक्तिया हमेशा कमज़ोर इरादो वाले राष्ट्र मे स्थान बनाती है। जहा खुद एतेमाद कमज़ोर पड जाए और आपसी मतभेद गालिब आ जाएं वहा विदेशी शक्तिया सरलता से अपने अड्डे स्थापित कर लेती है। लेकिन जहा राष्ट्र जागरूक हो अपने इतिहास और अपने सम्मान को याद रखते हो वहा किसी विदेशी शक्ति के लिए स्थाई तौर पर ठहरना आसान नही रहता।

आज मध्य एशिया मे परिवर्तित होते हालात यही बता रहे है कि अमेरिका के कई फ़ौजी अड्डे खाली हो चुके है और बाकी स्थानो से भी उसका निकलना कठिन नही रहा है। अगर अरब जगत इस वास्तविकता को समझ ले और अपने भविष्य के संबंध मे स्पष्ट कार्रवाई करे तो वह दिन दूर नही जब इस क्षेत्र मे विदेशी सैन्य शक्ति का द्वारा बंद हो जाएगा और अरब की धरती अपने असल खुदमुख्तार हैसीयत के साथ दुनिया के सामने खड़ी होगी।

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